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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

"न्यायोचित"

प्रायः यह देखा जाता है कि जो आम जन है उसको लगभग सभी विभागो में जानबूझ कर परेशान किया जाता है। आमजन सबकुछ चुपचाप सहन करता रहता है लेकिन कभी -कभी आमजन के सब्र का बाँध टूट जाता है और वह हिम्मत करके न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है। उसको देर से ही सही न्याय भी मिल जाता है ,लेकिन क्या ऐसी व्यवस्था नही हो  सकती कि जो पीड़ित न्याय पाने के लिए न्यायालय आया है उसको पूर्ण न्याय दिलाने के लिए न्यायालय यह भी संज्ञान ले कि जिस  कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा पीड़ित को प्रताड़ित किया गया उसके विरुद्ध भी दंडात्मक कार्यवाही के आदेश पारित किये जाये।  यदि ऐसी व्यवस्था सम्भव हो सके ,तो जो अधिकारी या कर्मचारी आमजन को परेशान करते है उन पर अंकुश लगेगा और न्यायालयों में वादो की संख्या में भी अविश्वसनीय कमी आयेगी। ऐसा मेरा विचार है। 
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