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शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

bacche

बच्चे रोते है क्यों,बच्चे हंसते है क्यों
क्योकि वे अभी अंजान है,मानव की न उन्हें पहचान है,
जैसे ही वे मानव को लेंगे पहचान,जाग उठेगा उनमे स्वाभिमान ,
नखरे दिखाएगे अनेक,कम नहीं करेगे नेक,  
यदि घरवाले डांटेंगे,उनकी बातो को काटेंगे,
भेजते है कालेजो में,मिलते है सिनेमाघरों में या कही और,
फुर्सत मिलने पर जाते है कॉलेज में,
कहते है सर प्रजेंट  मैं कुछ तो कर देते है प्रजेंट और कुछ कर देते है अब्सेंट,
फिर क्यां गुरूजी को रोब दिखाना,
कहते है गुरूजी कॉलेज से बाहर आना,
गुरूजी ने भी ऐसी चाल  चलाई,धूर्त बच्चे की एक भी प्रजेंट नहीं लगाई,
फिर क्यां रह गया परीक्षा से वंचित,हुआ बहुत चिंतित,
घबराया,अब तो मार पड़ेगी
(मन ही मन सोचता है ) और तो बसका नहीं 
आत्महत्या करनी पड़ेगी;
                     आजाद सिंह पंवार 

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